पौड़ी। पौड़ी में आयोजित बैठक में गोवंश संरक्षण आयोग ने गोवंश संरक्षण और गो-सदनों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। गो-सदनों के लिए भूमि चयन, राजकीय अनुदान, निराश्रित गोवंश की देखरेख और डेयरियों के पंजीकरण सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों को गो-सदनों के लिए भूमि चयन की कार्रवाई 15 दिन के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए।
आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अण्थवाल ने बताया कि बैठक में गोवंश संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई, गोवंश के जन्म-मरण की रिकॉर्डकीपिंग, डेयरियों का पंजीकरण और नियमित जांच सुनिश्चित करने को कहा गया। निराश्रित गोवंश को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिन निकायों में गोवंश लिफ्टिंग वैन उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल वाहन की व्यवस्था करने को कहा गया। गोहत्या, गोकशी और गो तस्करी पर पुलिस को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि जिले के 25 गो-सदनों में 2,653 निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। अब तक 2 लाख 76 हजार 76 गोवंश की ईयर टैगिंग की जा चुकी है, जबकि 73.61 प्रतिशत का टीकाकरण पूरा हो चुका है। वहीं, गो सेवकों ने बैठक में समय पर भुगतान और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था समेत विभिन्न मांगें रखीं। आयोग की ओर से इस पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
