TMC का महीने भर में तिनका-तिनका बिखरा, मुसीबतों का पहाड़ टूटा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को करारी शिकस्त मिली थी। चुनाव में तो राजनीतिक दलों की हार जीत होती रहती है। लेकिन टीएमसी पर तो हारते ही मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। महीने भर के अंदर पार्टी दो फाड़ हो गई है। शायद ममता बनर्जी को इसका एहसास नतीजे आते ही हो गया था।

इसीलिए उन्होंने नतीजों के फौरन बाद ऐलान कर दिया कि अब वो अपनी पूरी ऊर्जा केंद्र से नरेंद्र मोदी की सरकार को हटाने में लगायेंगी। उन्होंने कहा- अब वो मुख्यमंत्री नहीं है और अब वो अपना समय देशभर में एक ऐसी ताकत खड़ा करने में लगायेंगी जो बहुत जल्दी ही मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेंगी। इस बयान को अच्छी खासी सुर्खियां भी मिलीं।

ममता बनर्जी के दावे को सुर्खियां तो मिल गई लेकिन वास्तविकता क्या है? भारतीय राजनीति के इतिहास में आज तक किसी राजनीतिक दल का इतनी तेजी से विघटन नहीं हुआ जैसा टीएमसी का। सिर्फ एक महीने के अंदर टीएमसी के दो-तिहाई विधायक पार्टी से अलग हो चुके हैं। लोकसभा के दो-तिहाई सांसद अलग होने के लिए लगातार बैठक कर रहे हैं और स्पीकर को पत्र लिख रहे हैं। राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद इस्तीफे देने लगे हैं। उनकी अपनी पार्टी में ममता बनर्जी के पक्ष में बोलने वाले गिनती के दो चार नेता बच गए हैं। टीएमसी के संस्थापक नेता दिन रात मीडिया में पार्टी की खामियां गिना रहे हैं और ममता बनर्जी मोदी सरकार को उखाड़ फेकने के दावे कर रही हैं। घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।

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